2009 में, यूनेस्को ने ‘ड्रैगन बोट फेस्टिवल’ को ’मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया, जिससे यह सम्मान पाने वाला पहला चीनी त्योहार बन गया।

चीनी संस्कृति का प्रमुख पारंपरिक त्योहार ‘ड्रैगन बोट फेस्टिवल’ चीन के सबसे पुराने और सबसे अहम पारंपरिक त्योहारों में से एक है। पारंपरिक चीनी चंद्र कैलेंडर के पांचवें महीने के पांचवें दिन मनाये जाने के कारण इसे ’डबल फिफ्थ फेस्टिवल’ भी कहा जाता है। यह त्योहार गर्मियों में सबसे लंबे दिन (समर सॉल्स्टिस) के आस-पास मनाया जाता है, और यिन-यांग की सोच के अनुसार, यह समय ’यांग’ काल (विकास का समय) से ’यिन’ काल (क्षय या गिरावट का समय) में बदलाव का संकेत देता है। पारंपरिक रूप से इस समय को बीमारी और दुर्भाग्य का दौर माना जाता था, इसलिए बुरी आत्माओं और बीमारियों को दूर रखने के लिए खास रीति-रिवाज किए जाते थे। इस वर्ष यह 19 जून को मनाया गया।

सांस्कृतिक क्रांति के दौरान इस त्योहार की लोकप्रियता में कमी आई थी, क्योंकि उस समय कई पारंपरिक रीति-रिवाजों को हतोत्साहित किया गया था। हालाँकि, हाल के दशकों में इसे फिर से काफी बढ़ावा मिला है। 2008 में चीनी सरकार ने ‘ड्रैगन बोट फेस्टिवल’ को आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश के रूप में बहाल किया। 2009 में, यूनेस्को ने ‘ड्रैगन बोट फेस्टिवल’ को ’मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’  की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया, जिससे यह सम्मान पाने वाला पहला चीनी त्योहार बन गया। आज के समय में, यह त्योहार कई उद्देश्यों को पूरा करता है जैसे-पारंपरिक चीनी संस्कृति को संरक्षित करना, परिवार और समुदाय के रिश्तों को मजबूत करना, सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देना, चीन की अमूर्त विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करना आदि।

सेहत व खुशहाली को बढ़ावा देता है यह त्यौहार 

‘हैडबुक ऑफ़ चाइनीज़ माइथोलॉजी’ में लिहुई यांग और डेमिंग एन लिखते हैं कि शांग राजवंश के समय से ही समुदाय ड्रैगन को समर्पित बारिश बुलाने वाले अनुष्ठान किया करते थे। ड्रैगन चीनी संस्कृति के सबसे महत्वपूर्ण पौराणिक जीवों में से एक है, जिसके बारे में माना जाता है कि वह बारिश, नदियों और समुद्रों को नियंत्रित करता है। एक और थ्योरी और है जिसके अनुसार ड्रैगन बोट रेसिंग की शुरुआत बुरी ताकतों को दूर भगाने और सेहत व खुशहाली को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, लॉस एंजिल्स से एंथ्रोपोलॉजी में पीएचडी करने वाली रिसर्चर एरिन थॉमसन का कहना हैं कि लोक मान्यताओं में पांच (五) अंक को अशुभ माना जाता है, क्योंकि यह ’वू (午) अक्षर जैसा दिखता है। ’वू’ यिन-यांग का मध्य-बिंदु है, और माना जाता था कि इस समय शरीर सबसे ज्यादा कमज़ोर होता है। ’ड्रैगन बोट फेस्टिवल’ के दौरान आज भी कई आम रीति-रिवाज निभाए जाते हैं, जैसे कि मिनरल्स और खुशबूदार जड़ी-बूटियों से भरी छोटी थैलियां पहनना; माना जाता है कि ऐसा करने से दुर्भाग्य से बचा जा सकता है। 

यह त्यौहार मशहूर चीनी विद्वान ’कू युआन’ के जीवन और मृत्यु की याद में भी मनाया जाता है, जो तीसरी सदी ईसा पूर्व में ’चू’ राज्य के राजा के वफ़ादार मंत्री थे। कू युआन की समझदारी और बुद्धिमानी से दरबार के दूसरे अधिकारी उनसे नाराज़ हो गए; उन्होंने कू युआन पर साज़िश रचने का झूठा आरोप लगाया, जिसके बाद राजा ने उन्हें राज्य से निकाल दिया। राज्य से निकाले जाने के दौरान, कू युआन ने अपने राजा और लोगों के प्रति अपना गुस्सा और दुख ज़ाहिर करने के लिए कई कविताएँ लिखीं। 278 ईसा पूर्व में, 61 साल की उम्र में, कू युआन ने अपनी छाती से एक भारी पत्थर बांधकर ’मिलुओ’ नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली। ’चू’ राज्य के लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की क्योंकि वे कू युआन को एक सम्मानित व्यक्ति मानते थे; उन्होंने अपनी नावों में कू युआन को बहुत ढूंढा, लेकिन उन्हें बचा नहीं पाए। वहाँ के लोगों ने ’कू युआन’ के लिए नदी में पके हुए चावल (बलि के तौर पर) फेंकने की परंपरा शुरू की; उनका मानना था कि इससे नदी की मछलियाँ ’कू युआन’ के शरीर को नहीं खा पाएँगी। शुरू में, स्थानीय लोगों ने ’ज़ोंगज़ी’ बनाने का फ़ैसला किया, इस उम्मीद में कि वे नदी में डूबकर ’कू युआन’ के शरीर तक पहुँच जाएँगे। 

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के नजरिए से

‘ड्रैगन बोट फेस्टिवल’ 2,000 साल से भी अधिक पुराना है, हालाँकि इसकी असल शुरुआत को लेकर अलग-अलग राय हैं। जानकारों का मानना है कि यह त्योहार इससे जुड़ी मशहूर कहानियों से भी पुराना है। हो सकता है कि इसकी शुरुआत दक्षिणी चीन में खेती और धार्मिक रीति-रिवाजों के तौर पर हुई हो, जो नदी की पूजा, उपजाऊपन और अच्छी फसल की प्रार्थना से जुड़े थे। पुराने समय के लोग ड्रैगन को बारिश और पानी का नियंत्रक मानते थे, जो चावल की खेती के लिए बहुत ज़रूरी थे। ‘हैंडबुक ऑफ़ चाइनीज़ माइथोलॉजी’ में लिहुई यांग और डेमिंग एन लिखते हैं कि शांग राजवंश के समय से ही समुदाय ड्रैगन को समर्पित बारिश बुलाने वाले अनुष्ठान करते थे। 

माना जाता है कि शांग राजवंश के लोग कैलेंडर का इस्तेमाल करते थे और उन्हें खगोल विज्ञान और गणित की जानकारी थी। यह बात पुरातत्वविदों को कछुए की खोल पर मिले लेखों से पता चली है। शुरुआत में शांग कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित था, लेकिन वान-नियन नाम के एक व्यक्ति ने सूर्य पर आधारित कैलेंडर बनाया। उन्होंने अपने ऑब्ज़र्वेशन से 365 दिनों का साल तय किया और साल के दो सबसे लंबे और सबसे छोटे दिनों (सोलस्टिस) की सही पहचान की। शांग राजवंश के कारीगर कांसे (ब्रॉन्ज़) की बेहतरीन चीज़ें, मिट्टी के बर्तन और जेड (एक तरह का कीमती पत्थर) से बनी छोटी-छोटी सजावटी चीज़ें बनाते थे। कांस्य युग के दूसरे कारीगरों के उलट, शांग राजवंश के कारीगर ’लॉस्ट-वैक्स’ तरीके के बजाय ’पीस-मोल्ड कास्टिंग’ का इस्तेमाल करते थे। इसका मतलब था कि वे जिस चीज़ को बनाना चाहते थे, पहले उसका एक मॉडल बनाते थे और फिर उसे मिट्टी के सांचे (मोल्ड) से ढक देते थे। इसके बाद मिट्टी के सांचे को अलग-अलग हिस्सों में काटकर हटा दिया जाता था और फिर से पकाकर एक नया, जुड़ा हुआ सांचा तैयार किया जाता था।

भारत में भी दक्षिण भारतीय राज्य केरल में कुछ यूं ही मनाया जाने वाला फसल का त्योहार ’ओणम’ भी अपने चहेते पौराणिक राजा महाबली की प्रतीकात्मक वापसी का प्रतीक है, जिनके शासनकाल को केरल के लिए ’स्वर्ण युग’ माना जाता था। मान्यता है कि महाबली साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने आते हैं, और इसी वजह से उनके भव्य स्वागत के लिए ओणम का त्योहार मनाया जाने लगा। इसी तरह, पोंगल, जिसे ’तमिलर तिरुनल’ यानी ’तमिल लोगों का त्योहार’ भी कहा जाता है, तमिलनाडु का एक जीवंत और बहुत प्रिय फसल का त्योहार है, जिसे हर साल जनवरी में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। सूर्य देव को समर्पित यह चार दिन का त्योहार उस समृद्धि और भरपूर पैदावार के लिए आभार व्यक्त करता है जो फसल का मौसम लोगों को देता है। 

निष्कर्ष

ड्रैगन बोट फेस्टिवल सिर्फ़ एक खेल या खाने-पीने की परंपरा नहीं है। यह चीनी सभ्यता की कई अहम और स्थायी बातों को दिखाता है जैसे वफ़ादारी और देशभक्ति, जिसे ’कू युआन’ ने मिसाल के तौर पर पेश किया था। इसके बहाने पूर्वजों के प्रति सम्मान और ऐतिहासिक यादें ताजा की जाती है वहीं इंसानों और प्रकृति के बीच तालमेल होता है। मिल-जुलकर काम करने और सामुदायिक भावना से प्रेरित यह त्यौहार मौसम की समझ और सेहत से जुड़ी पारंपरिक आदतों को लेकर जागृत करता है। लगातार बढ़ती इसकी लोकप्रियता यह दिखाती है कि कैसे पुरानी परंपराएँ अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए आधुनिक जीवन के साथ ढल सकती हैं।

Image Credit: CGTN

Author

Mrs. Rekha Pankaj is a senior Hindi Journalist with over 38 years of experience. Over the course of her career, she has been the Editor-in-Chief of Newstimes and been an Editor at newspapers like Vishwa Varta, Business Link, Shree Times, Lokmat and Infinite News. Early in her career, she worked at Swatantra Bharat of the Pioneer Group and The Times of India's Sandhya Samachar. During 1992-1996, she covered seven sessions of the Lok Sabha as a Principle Correspondent. She maintains a blog, Kaalkhand, on which she publishes her independent takes on domestic and foreign politics from an Indian lens.

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